ASHTAVAKRA GITA

ASHTAVAKRA GITA


नानाश्चर्यमिदं विश्वं न किञ्चिदिति निश्चयी।

निर्वासनः स्फूर्तिमात्रो न किञ्चिदिव शाम्यति।।11.8।।